'लव बॉम्बिंग' के जरिए 18 साल की इस लड़की का ब्रेनवॉश किया गया। उसे सुबह 5 बजे उठकर प्रार्थना करने और पास्टर जोशुआ को अपना मसीहा मानने के लिए मजबूर किया गया।

दोस्ती, दगाबाजी और फरेब से भरी ये आपबीती है उस मासूम लड़की की, जिसे पंथ और प्यार के जाल में फंसाया गया। कहानी शुरू होती है साल 2011 से, जब ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में रहने वाली लिज कैमरून की उम्र केवल 18 साल थी। वो जनवरी का महीना था, जब लिज एक बुक स्टोर से बाहर निकल रही थीं, तभी मुस्कुराती हुई एक लड़की उनके पास आई।युजुन नाम की उस लड़की ने लिज से कहा कि वो एक विदेशी छात्रा है और ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति के बारे में पढ़ रही है। लिज के हाथ में एक फॉर्म थमाते हुए उसने कहा कि वह इस बारे में एक सर्वे भी कर रही है। लिज उस वक्त थोड़ा शर्मीली थी और उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह लड़की एक पंथ से जुड़ी हुई है और वो खुद भी उसमें फंसने वाली हैं। लिज ने झिझकते हुए वो फॉर्म भर दिया।
इस दौरान युजुन ने लिज से कुछ आसान से सवाल पूछे, जैसे कि उसे ऑस्ट्रेलिया में क्या पसंद है और उसका धर्म क्या है। लिज ने उसके सभी सवालों के जवाब दिए और फॉर्म भर जाने के बाद युजुन वहां से चली गई। लिज ने सोचा कि ये बस एक मामूली घटना थी और वो इसके बारे में भूल गई। लेकिन, कहानी कुछ और थी। एक हफ्ते के भीतर ही युजुन ने लिज को ईमेल किया और जान-पहचान बढ़ाते उसे अपने घर चाय पर बुलाया।
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